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  • तीन साल का अफेयर, लिव-इन और इंगेजमेंट… साथ रह रहे मंगेतर का कत्ल, लड़की बोली- वो नींद से जागा ही नहीं

    तीन साल का अफेयर, लिव-इन और इंगेजमेंट… साथ रह रहे मंगेतर का कत्ल, लड़की बोली- वो नींद से जागा ही नहीं

    गुजरात के वडोदरा से लव अफेयर की सनसनीखेज घटना सामने आई है. जिस युवती के साथ युवक शादी के सपने देख रहा था, इंगेजमेंट भी हो गई थी, उसी मंगेतर ने उसकी जान ले ली. यह मामला प्रतापनगर रेलवे कॉलोनी का है. 29 दिसंबर को 23 साल के युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी. जांच के बाद अब खुलासा हुआ है कि उसकी हत्या मंगेतर ने की थी.

    दरअसल, एक युवक का लड़की से अफेयर था. दोनों की सगाई भी हो चुकी थी. सगाई के बाद लड़की ने लड़के को अपने साथ रहने वड़ोदरा बुला लिया. इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि लड़की ने अपने मंगेतर की हत्या कर दी. वारदात के तीन दिन तक लड़की पुलिस को घुमाती रही, लेकिन जांच पड़ताल के बाद कहानी सामने आ गई.

    29 दिसंबर को वड़ोदरा की प्रतापनगर कॉलोनी में एक लड़के की लाश मिली थी. उसके साथ रहने वाली उसकी मंगेतर ने बताया कि लड़का नींद से जागा ही नहीं. लेकिन लड़के की लाश मिली थी. उसके साथ रहने वाली उसकी मंगेतर ने बताया कि लड़का नींद से जागा ही नहीं. लेकिन लड़के के पिता को शक हुआ तो जानकारी पुलिस को दी. इसके बाद जांच हुई पूरी कहानी पलट गई.

    पुलिस के मुताबिक, छोटा उदयपुर के रोजकुवा गांव का रहने वाला 23 साल का सचिन गणपतभाई राठवा और रेलवे में काम करने वाली रेखा सकुभाई राठवा बीते तीन साल से अफेयर में थे. दोनों ने सगाई भी कर ली थी. चूंकि रेखा वडोदरा के प्रतापनगर रेलवे कॉलोनी में रहती थी, इसलिए सचिन भी उसी के साथ रहने पहुंच गया. दोनों काफी समय से साथ रह रहे थे. इसी बीच सचिन को शक हुआ कि रेखा का किसी और से अफेयर चल रहा है.

    घटना के दिन सचिन और रेखा के बीच झगड़ा हुआ. इस दौरान रेखा ने सचिन से शादी से इनकार कर दिया. सचिन ने फोन करके अपने पिता को जानकारी दी कि वह शादी नहीं करना चाहता. जब सचिन ने शादी तोड़ने की बात कही तो रेखा ने सचिन को दुपट्टे से मार डाला.

    एसीपी प्रणव कटारिया ने कहा कि दोनों तीन साल से लिव-इन में थे. रेखा रेलवे में सेलर का काम करती थी. दोनों इंस्टाग्राम के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में आए थे, सगाई कर ली थी. हत्या के बाद रेखा ने ऐसा बर्ताव किया, मानो कुछ हुआ ही नहीं है. उसने सचिन के माता-पिता को भी ऐसा ही बताया कि वह नींद से ही नहीं जागा.

    सचिन के पिता गणपत राठवा ने कहा कि मेरा बेटा वड़ोदरा में रहता था. उसका फोन आया था. उसने बताया कि खा शादी से मना कर रही है. हमने शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. लेकिन उसने फोन किया तो मैंने रेखा से बात करने के लिए उसे कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठाया. इसके बाद रेखा का फोन आया और बताया कि सचिन नींद से नहीं उठ रहा है.

    पुलिस तीन दिन तक इस केस में ऐसे उलझी रही कि जैसे लड़की ने कुछ किया ही न हो, लेकिनपोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आते ही कहानी में मोड़ आ गया. फिलहाल, पुलिस ने लड़की के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

    Sources: https://www.aajtak.in

  • लिव इन रिलेशन में रह रहे जोड़े का गांव की सभा ने क्यों किया सामाजिक बहिष्कार, जानिए किन हालात में रहने को हैं मजबूर

    लिव इन रिलेशन में रह रहे जोड़े का गांव की सभा ने क्यों किया सामाजिक बहिष्कार, जानिए किन हालात में रहने को हैं मजबूर

    Jharkhand News, खूंटी न्यूज: झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा में लिव इन रिलेशन में रह रहे एक प्रेमी जोड़े का सामाजिक बहिष्कार करने का मामला प्रकाश में आया है. ये मामला तपकारा थाना क्षेत्र के गेंद टोली(बेहरा टोली) का है. इसी गांव के जय मसीह गुड़िया व अर्चना गुड़िया सहित उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया गया है. कारण यह है कि दोनों एक ही गोत्र के होने के बावजूद आपस मे प्रेम संबंध स्थापित कर साथ साथ रह रहे हैं. इन दोनों का सात माह का एक बेटा भी है.

    मिली जानकारी के अनुसार गेंद टोली के जय मसीह गुड़िया का बेहरा टोली के अर्चना गुड़िया के साथ प्रेम संबंध था. इसी बीच अर्चना गर्भवती हुई तो जय मसीह उसे अपने घर ले आया. दोनों परिवार की सहमति से जय मसीह व अर्चना साथ साथ रहने लगे. जय मसीह ने बताया कि इसके बाद बेहरा टोली गांव में ग्रामीणों की बैठक गांव के मुंडा नवीन गुड़िया की अगुवाई में हुई. बैठक में दोनों को बुलाया गया तथा उन्हें अलग अलग रहने को कहा गया. ऐसा नहीं करने पर सामाजिक बहिष्कार की बात कही गयी. जय मसीह ने उनसे कहा कि अर्चना गर्भवती है इस हालत में उसे नहीं छोड़ सकते. इसके बाद गांव की सभा ने उनके सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाया.

    जय मसीह व अर्चना ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार के बाद गांव के लोग दोनों परिवार के काम में हाथ नहीं बंटाते हैं. जिसके कारण वह खेती भी नहीं कर पा रहा है. गांव के लोग उनसे बात भी नहीं करते हैं. जिससे वे दोनों अपने को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं. बेहरा टोली गांव का मुंडा नवीन गुड़िया से बात करने पर उन्होंने बताया कि जय मसीह व अर्चना एक ही गोत्र के हैं और एक ही गोत्र में शादी करने की मनाही है. यह हमारी सामाजिक परंपरा है कि कोई भी व्यक्ति एक ही गोत्र में शादी नहीं कर सकता. इन्होंने परम्परा के विरुद्ध काम किया है. इसलिए इनके सामाजिक बहिष्कार का सामूहिक निर्णय लिया गया है.

    आपको बता दें कि झारखंड के खूंटी समेत कई जिलों में ढुकुआ विवाह की परंपरा है, जहां बिना विवाह के जोड़े लिव इन रिलेशन में रहते हैं. कहा जाता है कि शादी में पूरे गांव को भोज देने के बाद ही विवाह मान्य होता है. ऐसे में आर्थिक रुप से कमजोर लोग लिव इन में रहने को मजबूर रहते हैं. इसे ढुकुआ विवाह कहते हैं. हालांकि इसे मान्यता नहीं है. कई तरह के अधिकार से ये जोड़े वंचित रहते हैं. हाल के दिनों में स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस दिशा में पहल की है और सामूहिक विवाह कराया.

    Sources: https://www.prabhatkhabar.com/ Modified date: 

  • लिव-इन-पार्टनर का यौन शोषण करने के आरोप में शादीशुदा प्रेमी गिरफ्तार, 20 लाख रुपए भी ठगे

    लिव-इन-पार्टनर का यौन शोषण करने के आरोप में शादीशुदा प्रेमी गिरफ्तार, 20 लाख रुपए भी ठगे

    बेंगलुरु(न्यूज़ डेस्क)। बेंगलुरु के बगलकुंटे में पुलिस ने एक 29 साल के आदमी को कथित धोखाधड़ी, यौन शोषण और चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने एक महिला को रोमांटिक रिश्ते का झांसा देकर करीब 20 लाख रुपये और 200 ग्राम सोना ठग लिया था।

    यह मामला नेलमंगला से शुरू हुआ था और इसमें दो बहनों से जुड़ी घटनाओं की एक कड़ी सामने आई है। पुलिस ने बताया कि शुभम शुक्ला ने पहले एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की और कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया, फिर उसके परिवार तक पहुंचने के लिए उसका इस्तेमाल किया।

    बाद में उसने बड़ी बहन को निशाना बनाया और उसे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए फुसलाया। शुक्ला ने पीड़िता को अपने माता-पिता से झूठ बोलने के लिए मना लिया, यह कहकर कि वह काम के लिए मुंबई जा रही है। इसके बजाय, दोनों बेंगलुरु में तीन साल तक साथ रहे, इस दौरान उसने कथित तौर पर पैसे और कीमती सामान हड़प लिया।

    बाद में पीड़िता को पता चला कि शुक्ला पहले से शादीशुदा है। जब उससे इस बारे में पूछा गया, तो उसने अपनी पत्नी को तलाक देने का वादा किया, लेकिन उसे रोज़ाना परेशान करना जारी रखा। उत्पीड़न बर्दाश्त न कर पाने पर, महिला आखिरकार वहां से भाग गई और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट और धोखाधड़ी के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया। शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच जारी रहने तक वह हिरासत में है।

  • लिव-इन में रह रहे युवक की संदिग्ध मौत, पत्नी से चल रहा तलाक का केस, पिता ने की जांच की मांग

    लिव-इन में रह रहे युवक की संदिग्ध मौत, पत्नी से चल रहा तलाक का केस, पिता ने की जांच की मांग

    कोटा : शहर के कुन्हाड़ी थाना इलाके में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. इस मामले में लड़के के पिता मंगलवार को कोटा पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले में जांच की मांग कर दी है. उनका दावा है कि लड़के की मौत संदिग्ध है.

    इस पूरे मामले पर कुन्हाड़ी थाने के हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह का कहना है कि सोमवार सुबह 31 वर्षीय शुभम तिवारी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद मोर्चरी में उसके शव को शिफ्ट करवा दिया है. इसके परिजनों को सूचना दी थी. मामले में जिस भी तरह की शिकायत परिजन कर रहे हैं, उस रिपोर्ट व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल युवक के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप रहे हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर युवक की मौत का कारण का पता चल सकेगा. युवक बीते ढाई साल से लिव-इन में रह रहा था.

    हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह का कहना है कि शुभम तिवारी मूल रूप से यूपी के इटावा निवासी है. वह कोटा में ही कुन्हाड़ी इलाके की बालिता रोड स्थित एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में लिव-इन में हरियाणा के चंडीगढ़ निवासी 45 वर्षीय महिला के साथ रहता था. महिला ने पुलिस को बताया है कि शुभम की तबीयत रविवार देर रात अचानक खराब हो गई थी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया. वह रात में खाना खाकर सोए थे और उसके बाद सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी थी.

    2023 से रह रहे थे लिव-इन रिलेशनशिप में : महेश तिवारी का कहना है कि उनका बेटा शुभम 2014 में कोटा आ गया था. यहां पर एग्रीकल्चर कंपनी में काम करता था. साल 2017 में उसका विवाह यूपी के मैनपुरी निवासी रितु तिवारी से कर दिया था. साल 2018 में दोनों के एक बेटी भी हुई थी. इसके बाद दोनों के रिश्ते में खटास आ गई और लगातार लड़ाई झगड़े का क्रम जारी रहा. इसके बाद उन्होंने रितु को इटावा में ही रख लिया, लेकिन वह साल 2022 में अपने मायके चली गई और डिवोर्स का केस उसने फाइल कर दिया. इसके बाद साल 2023 मार्च से ही यह महिला के साथ लिव-इन में रह रहा था.

    परिजनों को थी लिव-इन में रहने की जानकारी : महिला का कहना है कि उसकी शुभम से मुलाकात बैंक में ही हुई थी. इसके बाद दोनों ने तय किया कि लिव-इन में रहेंगे. वो अपनी दोनों बेटियों के साथ ही शुभम के साथ लिव-इन में रहती थी. शुभम की पत्नी, बेटी और तलाक के केस के संबंध में भी उसे जानकारी थी. उसके परिजनों को भी इस संबंध में जानकारी दे दी गई थी. शुभम शराब पीने का आदी व चेन स्मोकर भी था. उसपर काफी कर्ज भी था.

    रिश्ता तोड़ चुका था बेटा : मृतक के पिता महेश कुमार तिवारी का कहना है कि उनका बेटा परिवार से रिश्ता तोड़ चुका था. महिला ने सोमवार सुबह 4:30 बजे कॉल पर बताया गया कि शुभम की मौत हो गई है. ये पता चलते ही पत्नी के साथ कानपुर से इटावा पहुंचे और इटावा से गाड़ी लेकर कोटा आए. मामले में पुलिस जांच की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि लिव-इन में रहने के दौरान महिला और शुभम के बीच मारपीट, लड़ाई-झगड़ा आम बात थी. शुभम घर पर बात करना भी पसंद नहीं कर रहा था. उन्होंने लिव-इन में रह रही महिला को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए जांच की मांग की है.

    Sources: https://www.etvbharat.com/

  • Meerut: चार साल लिव इन रिलेशन, कोर्ट मैरिज के बाद मुकरा, युवती ने 10 घंटे में अक्ल ठिकाने लगा दी

    Meerut: चार साल लिव इन रिलेशन, कोर्ट मैरिज के बाद मुकरा, युवती ने 10 घंटे में अक्ल ठिकाने लगा दी

    सांकेतिक तस्वीर।

    मेरठ। खिर्वा रोड के एक गांव में रह रहे युवक के घर के सामने शुक्रवार को एक युवती ने दस घंटे तक हंगामा किया। युवती ने दावा किया है कि फेसबुक पर दोस्ती के बाद युवक ने उससे कोर्ट मैरिज की है। वह अब अपनी ससुराल में रहना चाहती है। युवती के हंगामा करने पर प्रेमी उससे मारपीट कर घर से भाग गया। हालांकि पुलिस को सूचना देने के बाद रात दस बजे युवक के परिजनों ने उसे अपने मकान में बुला लिया।

    सीओ दौराला प्रकाश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि मवाना निवासी युवक काफी समय से खिर्वा रोड स्थित गांव में अपने परिवार के साथ रह रहा है। युवक की दोस्ती चार साल पहले फेसबुक पर जानी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवती से हुई थी। हंगामा कर रही युवती ने बताया कि चार साल तक दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहे और मार्च 2025 में दोनों ने कोर्ट मैरिज की।

    कुछ दिन पहले युवक के परिजनों को कोर्ट मैरिज की जानकारी हुई थी। परिजनों ने युवती को स्वीकार नहीं किया था। युवती ने मामले की पुलिस से शिकायत की थी। इसकी सुनवाई परिवार परामर्श केंद्र में हो रही है। युवती ने कई बार युवक से घर ले जाने के लिए कहा, मगर बात नहीं बनी।
    शुक्रवार दोपहर करीब बारह बजे युवती अपने प्रेमी के घर के बाहर पहुंच गई। यहां युवक भी अपने परिजनों के संग मौजूद था। युवती को देख आरोपी आग बबूला हो गया। आरोप है कि आरोपी ने युवती के साथ मारपीट कर दी। मारपीट करने के बाद आरोपी भाग गया। युवती दस घंटे तक मकान के बाहर ही डेरा डाले रही।
    पुलिस ने देर रात युवक के परिजनों से कहा कि यदि युवती चाहे तो उसकी ओर से मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। तब देर रात दस बजे युवक के परिजनों ने उसे मकान के अंदर ले लिया। सीओ दौराला का कहना है कि इस संबंध में तहरीर नहीं आई है। तहरीर आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
  • लिवइन पार्टनर पर धोखा देने का आरोप: लिव इन पार्टनर की चाह में फना हुई नर्स, जान देने का बेहद खतरनाक तरीका अपनाया

    लिवइन पार्टनर पर धोखा देने का आरोप: लिव इन पार्टनर की चाह में फना हुई नर्स, जान देने का बेहद खतरनाक तरीका अपनाया

    भोपाल: राजधानी भोपाल में एक नर्स ने प्रेम प्रसंग के चलते आपनी जान दे दी. पार्टनर से मिले धोखे के बाद नर्स ने आत्महत्या का बेहद खतरनाक तरीका अपनाया जिसे पुलिस सहित लोग हैरान रह गए. मृतका मेघा यादव अपने सपनों को पूरा करने और परिवार का सहारा बनने की चाह में पांच साल पहले नर्मदापुरम से भोपाल आई थी. लेकिन जिस शहर से उसे नई जिंदगी की उम्मीद थी, वहीं उसने अपनी जिंदगी खत्म कर ली.

    बेहोशी की हालत में अस्पताल छोड़ गया युवक

    मेघा जेके हॉस्पिटल के पास किराए के मकान में रहती थी और जेपी अस्पताल में ही नर्स के तौर पर काम करती थी. बुधवार रात को उसे गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था. इलाज के दौरान गुरुवार सुबह उसकी मौत हो गई. जानकारी के मुताबिक, मेघा पिछले चार वर्षों से एक युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी. वही युवक उसे बेहोशी की हालत में जेके हॉस्पिटल लेकर आया था. भर्ती करवाकर वहां से चला गया था. परिजन का कहना है कि घटना से कुछ समय पहले मेघा ने अपने भांजे से फोन पर बातचीत की थी और उस समय वह सामान्य लग रही थी. बाद में उसी रात युवक ने मेघा के मोबाइल से परिजन को फोन कर उसके अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी. अब युवक का फोन बंद आ रहा है.

    बड़े सपने लेकर भोपाल आई थी नर्स

    मेघा यादव मूल रूप से नर्मदापुरम की रहने वाली थी. उसका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था. मजदूरी करने वाले पिता ने बड़ी मुश्किलों से बेटी की पढ़ाई कराई. मेघा पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहती थी. इसी सपने को लेकर वह करीब पांच साल पहले नर्मदापुरम से भोपाल आई. यहां उसने बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की और पढ़ाई के बाद भोपाल के जेके अस्पताल में नौकरी करने लगी.

    4 साल लिव इन में रही, शादी से मुकरा पार्टनर

    नौकरी लगने के बाद मेघा ने भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे. परिजनों का आरोप है कि, इसी दौरान उसकी जान-पहचान भोपाल में लॉज चलाने वाले रूपेश से हुई. मेघा के भाई राजा ने बताया कि, ”4 साल तक रूपेश ने शादी का भरोसा देकर मेघा को अपने साथ रखा. लंबे समय तक वह पत्नी की तरह उसके साथ रही, लेकिन बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया.”

    राजा का कहना है कि, ”रूपेश ने मेघा के भरोसे और भावनाओं के साथ धोखा किया. शादी का झांसा देकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे मेघा गहरे तनाव में रहने लगी. लगातार मानसिक दबाव और धोखे से टूट चुकी मेघा ने आखिरकार आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया. मेघा की मौत के बाद परिवार सदमे में है.” परिजनों का कहना है कि, जिस बेटी से उन्हें सहारे की उम्मीद थी, उसी ने जिंदगी खत्म कर ली. परिवार ने आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है. फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

    मामले की जांच में जुटी पुलिस

    कोलार टीआई संजय सोनी का कहना है कि, ”युवती के मोबाइल, कॉल डिटेल्स और परिजनों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है. दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी है.”

    यह मामला न सिर्फ एक युवती की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि भरोसे, रिश्तों और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है. अब देखना होगा कि जांच में क्या सच सामने आता है और पीड़ित परिवार को कब इंसाफ मिलता है.

    Sources: digital media

  • लिव-इन में रह रही शतरंज की नेशनल प्लेयर ने किया सुसाइड, पार्टनर फंदे से उतारकर अस्पताल लाया

    लिव-इन में रह रही शतरंज की नेशनल प्लेयर ने किया सुसाइड, पार्टनर फंदे से उतारकर अस्पताल लाया

    MP के इंदौर के खजराना में लिव-इन में रह रही शतरंज की नेशनल प्लेयर रही युवती ने पार्टनर से विवाद के बाद सुसाइड कर लिया। उसे साथी ही फंदे से उतारकर अस्पताल लेकर पहुंचा था..

    इंदौर: MP के इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र में एक युवती द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही 22 वर्षीय युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी। घटना के बाद युवती के साथ रह रहे युवक को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आत्महत्या से पहले युवक और युवती के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी।

    मृतका की पहचान जागृति के रूप में हुई है। वह मूल रूप से देवास जिले की रहने वाली बताई जा रही है और उज्जैन के एमआईटी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। पुलिस के अनुसार जागृति करीब एक सप्ताह पहले ही इंदौर आई थी और सांईकृपा कॉलोनी में अपने मित्र हर्ष मिश्रा के साथ रह रही थी। दोनों के बीच पहले से दोस्ती थी, जो बाद में लिव-इन रिलेशनशिप में बदल गई।

    लिव-इन पार्टनर हर्ष ही अस्पताल लेकर पहुंचा

    बुधवार रात करीब 11:30 बजे एमवाय अस्पताल से पुलिस को सूचना मिली कि एक युवती को मृत अवस्था में लाया गया है। अस्पताल पहुंचे डॉक्टरों ने जांच के बाद जागृति को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल लेकर पहुंचने वाला युवक हर्ष मिश्रा ही था। उसने पुलिस को बताया कि रात करीब 9 बजे उसने जागृति को कमरे में फंदे पर लटका हुआ देखा, जिसके बाद वह तुरंत उसे अस्पताल लेकर गया।

    घटना से पहले दोनों में विवाद हुआ था

    खजराना थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उस कमरे की बारीकी से जांच की, जहां युवती ने आत्महत्या की थी। फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया और जरूरी साक्ष्य एकत्र किए गए। पुलिस के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि घटना से पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, हालांकि विवाद किस कारण हुआ यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।

    शतरंज की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही मृतका

    परिजनों ने इस पूरे मामले को लेकर संदेह भी जताया है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि जागृति इंदौर कैसे और किन परिस्थितियों में आई। परिजनों के अनुसार जागृति पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी सक्रिय थी और वह शतरंज की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी थी।

    मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग

    युवती की मौत की खबर फैलते ही कुछ आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि भी एमवाय अस्पताल पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। संगठनों ने देवास कलेक्टर से न्यायिक जांच कराए जाने की मांग भी उठाई है।

    Sources: https://navbharattimes.indiatimes.com/

  • बिना तलाक लिव-इन में रहना गैरकानूनी, हाई कोर्ट बोला- जीवनसाथी के अधिकारों को कुचल अपनी आजादी नहीं चुन सकते

    बिना तलाक लिव-इन में रहना गैरकानूनी, हाई कोर्ट बोला- जीवनसाथी के अधिकारों को कुचल अपनी आजादी नहीं चुन सकते

    Allahabad High Court live-in relationship ruling: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिश्तों पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा व्यक्ति बिना तलाक लिए लिव-इन में नहीं रह सकता, क्योंकि यह जीवनसाथी के अधिकारों का उल्लंघन है।

    Legal rights of live in partners: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दो महत्वपूर्ण और अलग-अलग फैसले सुनाए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि जहां बालिग जोड़ों को अपनी मर्जी से साथ रहने और सुरक्षा पाने का पूरा हक है, वहीं शादीशुदा लोग अपनी जिम्मेदारी से भागकर लिव-इन का सहारा नहीं ले सकते। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने इन मामलों पर कानूनी और संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की है।

    शादीशुदा हैं तो बिना तलाक नहीं मिलेगी लिव-इन की इजाजत

    कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक शादीशुदा व्यक्ति अपने पति या पत्नी को तलाक दिए बिना कानूनी तौर पर किसी तीसरे के साथ लिव-इन में नहीं रह सकता। इस मामले में एक महिला ने अपने साथी के साथ सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन सरकारी वकील ने बताया कि महिला पहले से शादीशुदा है और उसने अपने पति दिनेश से तलाक नहीं लिया है। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में सुरक्षा देना गलत होगा।

    निजी आजादी की भी एक सीमा होती है

    जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने टिप्पणी की कि व्यक्तिगत आजादी असीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि आपकी आजादी वहां खत्म हो जाती है, जहां से दूसरे व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार शुरू होते हैं। एक पति या पत्नी को अपने जीवनसाथी के साथ रहने का संवैधानिक अधिकार है। निजी आजादी के नाम पर इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता। अगर पार्टनर जीवित है और तलाक नहीं हुआ है, तो लिव-इन संबंध को मान्यता नहीं दी जा सकती।

    बालिग जोड़ों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी

    एक अन्य मामले में, हाई कोर्ट ने लिव-इन में रह रहे 12 बालिग जोड़ों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। इन जोड़ों ने अपने परिवारों से जान का खतरा बताया था। कोर्ट ने कहा कि एक बार व्यक्ति बालिग हो जाता है, तो वह किसके साथ रहना चाहता है, यह उसका अपना फैसला है। परिवार का कोई भी सदस्य उनके शांतिपूर्ण जीवन में बाधा नहीं डाल सकता। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि भविष्य में इन जोड़ों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

    जीवन का अधिकार सबसे ऊपर है, चाहे वह शादीशुदा हो या अविवाहित। सिर्फ इसलिए कि किसी जोड़े ने औपचारिक रूप से शादी नहीं की है, उन्हें उनके मौलिक अधिकारों से दूर नहीं रखा जा सकता।

    नैतिकता और कानून के बीच का अंतर

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सामाजिक नैतिकता और व्यक्तिगत नैतिकता अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इससे किसी रिश्ते की कानूनी वैधता पर असर नहीं पड़ता। कोर्ट का काम यह तय करना नहीं है कि किसी बालिग का साथ रहने का फैसला सही है या गलत। अगर उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, तो राज्य सरकार का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह उनकी जान और आजादी की रक्षा करे।

    Sources: https://www.livemint.com/

  • Live-in में रहना क्यों बन रहा है युवाओं की पहली पसंद? यहां पढ़ें इससे जुड़े कानूनी दांव-पेंच

    लिव-इन रिलेशनशिप का चलन मेट्रो सि‍टीज में तेजी से बढ़ रहा है। भारत में ये कानूनी है पर इसके कुछ नुकसान भी हैं। लेकिन अगर आप ल‍िव-इन में रहते हैं या फ‍िर रहने की साेच रहे हैं तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी हाेनी चाह‍िए। इसके कुछ कानूनी न‍ियम भी हैं और नुकसान भी।

    नई दि‍ल्‍ली। प‍िछले कुछ सालों में मेट्रो स‍िटीज में लिव-इन रिलेशनशिप (Live-In Relationship) का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। अमीर लोगों में तो ये आम हाे गया है। कोई भी अगर बाहर रहता है तो वो पार्टनर के साथ ल‍िव-इन में रहना ही पसंद करता है। हालांक‍ि अब मिडिल क्लास के लोग भी इसे अपना रहे हैं। अगर वे अपने र‍िश्‍ते को लेकर सीर‍ियस होते हैं तो वे इस दौरान देखते हैं क‍ि पार्टनर के साथ उनकी आगे की ज‍िंदगी बीत पाएगी या नहीं।

    लेक‍िन हर क‍िसी के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। फ‍िल्‍हाल भारत में ये पूरी तरह से लीगल हो गया है। यानी क‍ि कोई भी कपल अब ब‍िना क‍िसी झ‍िझक के और ब‍िना शादी क‍िए साथ रह सकता है। ऐसा हम नहीं, बल्‍क‍ि अभय द्विवेदी (अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ) का कहना है। उन्‍होंने इसके बारे में व‍िस्‍तार से जानकारी दी है। आज हम आपको ल‍िव-इन में रहने के नुकसान और उसके कानून के बारे में बताएंगे।

    क्‍या है ल‍िव-इन र‍िलेशन?

    अभय द्विवेदी ने बताया क‍ि लिव-इन रिलेशनशिप का मतलब होता है शादी किए बिना साथ रहना। भारत में लंबे समय तक शादी से पहले साथ रहना समाज और संस्कृति के खिलाफ माना जाता था। हिंदू धर्म में ‘एकपत्नी व्रत’ (एक पुरुष, एक पत्नी) को सबसे पवित्र विवाह ही माना गया है। लेकिन समय के साथ लोगों की सोच बदल गई है और अब धीरे-धीरे लिव-इन रिलेशनशिप को भी स्वीकार किया जाने लगा है।

    भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को कुछ देशों की तरह कानूनी शादी नहीं माना जाता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी किए बिना साथ रहना कोई अपराध नहीं है और न ही ये इल-लीगल है। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को शादीशुदा जोड़े जैसे सारे अधिकार नहीं मिलते, लेकिन उन्हें हमारा कानून कुछ सुरक्षा जरूर देता है।

    लिव-इन रिलेशनशिप में मिलने वाले अधिकार

    उन्‍होंने बताया क‍ि भारत में लिव-इन रिलेशनशिप की कोई खास परिभाषा नहीं है। इसे बस दो लोगों की सहमति से साथ रहने का फैसला माना जाता है। इस तरह साथ रहने से लोग एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और शादी के बारे में सही फैसला ले सकते हैं। लेकिन इसके साथ ही ये जानना भी जरूरी है कि लिव-इन रिलेशनशिप में क्या अधिकार मिलते हैं-

    भरण-पोषण का अधिकार

    क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 की धारा 125 (1) (a) बताती है क‍ि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली लड़की को भी भरण-पोषण यानी क‍ि maintenance का अधिकार है। यानी अगर उसका पार्टनर उसे फाइनेंश‍ियल सपोर्ट देने से मना करता है तो भारत का कानून लड़की की मदद करेगा।

    बच्चों का प्रॉपर्टी में भी हक

    अगर कोई कपल बिना शादी किए लंबे समय तक साथ रहते हैं, तो कानूनी तौर पर उन्हें शादीशुदा माना जा सकता है। अगर उनके बच्चे हैं, तो उन बच्चों को भी सारे कानूनी अधिकार मिलेंगे। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 16 के मुताब‍िक, ऐसे बच्चों को अपने माता-पिता की अपनी कमाई हुई संपत्ति (self-acquired property) में पूरा हक मिलेगा। साथ ही 144 BNSS में बच्चों को भरण-पोषण का भी अधिकार है। यानी अगर माता-पिता अलग भी हो जाएं तो भी बच्चों की जिम्मेदारी दोनों पर होगी।

    बच्चों की कस्टडी का अधिकार

    जब लिव-इन रिलेशनशिप खत्म हो जाती है, तो बच्चों की कस्टडी (देखभाल) एक बड़ा सवाल बन जाती है। भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के बच्चों के लिए कोई खास कानून नहीं है, इसलिए कोर्ट इन मामलों को शादीशुदा कपल के बच्चों की तरह ही देखती है। कोर्ट का सबसे पहला और जरूरी मकसद ये देखना होता है कि बच्चे का भला और भविष्य किसके साथ रहने में है।

    महिलाओं की सुरक्षा और कानून

    भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कोई खास कानून नहीं है। लेकिन साल 2010 में महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसे कानूनी तौर पर मान्यता दी गई। इसके बाद, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को घरेलू हिंसा कानून के तहत पूरी सुरक्षा मिलती है।

    लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान भी जानें

    • इस रिलेशनशिप में कमिटमेंट की कमी होती है। यानी क‍ि आपका पार्टनर आपको कभी भी छोड़कर जा सकता है।
    • भारत में भले ही ये लीगल हाे गया है लेक‍िन अभी भी भारत की कुछ ऐसी जगहें हैं जहां ऐसे लोगों को सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है।
    • हमेशा इनसिक्योरिटी बनी रहती है कि रिश्ता चलेगा या नहीं। इससे तनाव बढ़ सकता है।
    • बिना शादी के साथ रहने पर एक समय बाद ट्रस्ट इशूज होने लगते हैं।
    • कई बार तो ये क्राइम का रूप भी ले चुके हैं।
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    Sources: https://www.jagran.com/ 01 Sep 2025

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