लिव-इन रिलेशनशिप: भारत में लिव-इन पार्टनर्स के कानूनी अधिकार

लिव-इन रिलेशनशिप का मतलब आमतौर पर शादी किए बिना साथ रहना होता है। भारत में, लंबे समय तक भारतीय संस्कृति के अनुसार शादी से पहले साथ रहना अपराध माना जाता था। पहले हिंदू धर्म में ‘एकपत्नी व्रत’ को विवाह के सबसे पवित्र रूपों में से एक माना जाता था, लेकिन अब समय के साथ लोगों में बदलाव आया है और वे कुछ अन्य प्रथाओं को भी स्वीकार करने लगे हैं:

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को कुछ अन्य देशों की तरह कानूनी बंधन के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है। हालांकि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि बिना शादी के लिव-इन रिलेशनशिप में रहना आपराधिक अपराध या अवैध नहीं है। बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों को विवाहित जोड़ों के समान कानूनी अधिकार तो नहीं मिलते, लेकिन उन्हें कानूनों के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

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भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के तहत अधिकार

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। इसे दो व्यक्तियों के आपसी सहमति से एक साथ रहने के प्रस्ताव के रूप में परिभाषित किया जाता है। इससे दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे को समझने का अवसर मिलता है, जिससे विवाह संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, भारत में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्ति को अपने अधिकारों की जानकारी भी होनी चाहिए।